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अगर ज़िंदगी आसान होती तो ?

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कभी सोचा है तुमने की अगर ज़िंदगी आसान होती, बिना कोई मुश्किल सब मिल जाता  तो क्या तुम आज जितने काबिल और समझदार हो कभी बन पाते? नही ना? इसलिए जिंदगी में जो भी हो रहा है या जो हो चुका है उसका शुक्र मनाओ क्युकी कही ना कही वो तुम्हे ज़िंदगी में आगे मदद करने वाला है। अगर तुम कमजोर हो तो तुम्हे वो मज़बूत बना रहा है तुम जिन चीज़ों से वाकिफ नहीं हो उससे वो तुम्हे वाकिफ करा रहा है। और जिंदगी इसी का नाम है बिना कोई अनुभव के जीना भी कोई जीना हुआ ;) -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

मन के विचार

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हार कैसे मानलू मैं अपने पिता से जो सीखा है उम्मीद का फूल कैसे तोड़ दू मैं अपने हाथो से जो सीचा है हंसना कैसे भूलूं मैं  अपनी माता से जो सीखा है। ज़िंदगी है इसलिए तो सता रही है मौत तो आनी है लेकिन वो कहा कुछ बता रही है दिन में चांद देखने की तमन्ना होती है और चांद आते ही सूरज की कामना  फस चुका हु अपने ही विचारो में इनसे बाहर तो आना है लेकिन इनसे दूर भी नही जाना है। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

उम्मीद....

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उम्मीद का छाता लिए चल रहा हु इस मुश्किलों की बरसात में आस पास लोग कम है बरसात का शोर काफी है मंजिल का पता नही है रास्ता बताने वाला भी कोई नही है अकेले चल रहा हु इस रास्ते पे ना किसी से मिलने की ख्वाइश है ना कही डेरा डालने के लिए वक्त। एक समय था जब वक्त ही वक्त था और आज वक्त ऐसे बीत रहा है जैसे प्थजड में पत्ते कभी खुशियों की कोई गिनती नहीं थी और आज बस कुछ गीनी चुनी खुशियां बची है निराशा के बादल मुझे घेर रहे है मुश्किलों की बरसात हो रही है लेकिन उम्मीद का छाता लिए चल रहा हु इस मुश्किलों की बरसात में। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

हमे क्या होना है हम मर्द है

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हर मुश्किल को हंसकर सह लेते है घर की जिम्मेदारियों को अपने कंधो पे ले लेते है परिवार पर कोई मुसीबत ना आय उसका हमेशा ध्यान रखते है दुख चाहे कितना भी हो लेकिन कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" बचपन से ही हमे सीखा दिया जाता है की मर्द रोते नही कभी कभी रास्ता भटक जाते है लेकिन हम खोते नही मुसीबते सर पे आने से हम ज्यादा सोते नही कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" अपने पैरो पर खड़े होने की कोशिश करते है कई बार गिर भी जाते है लेकिन वापस उठकर जी जान से मेहनत करते है दर्द छुपाने की कला में कुछ इस कदर माहिर है की कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" कभी हमे भी कुछ समझ नही आता ये ज़िंदगी से मन करता है हार मानले ये ज़िंदगी से लेकिन परिवार का चेहरा सामने आने से उम्मीद और हिम्मत दोनो वापस लाने की कोशिश करते है थोड़ी कोशिश रोने की भी करते है लेकिन कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग म...

सांप सीढी और ज़िंदगी

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आपने सांप सीढी का खेल तो जरूर खेला होगा १ से १०० तक जाना आसान तो नही था लेकिन कोशिश करने पर पोहचा जा सकता था कभी कभी तो अच्छी किस्मत या लक के कारण जल्दी सीडी मिल जाती और सांप भी नही खाता। कभी तो मुश्किल से सीडी मिलती और सीडी चढ़कर ही आगे सांप खा लेता और फिर से शुरू करना पड़ता और ये सिलसिला चलता ही रहता लेकिन १०० पर आके जीतने की खुशी कुछ अलग ही होती थी। इसी तरह ज़िंदगी भी सांप सीडी जैसी ही है कभी ऊपर ले जाती है और कभी नीचे भी गिरा देती है और कभी तो ऐसा लगता है कि हमारे लक्ष्य तक जाना मुश्किल है। लेकिन अगर आप ज़िंदगी को सांप सीडी की तरह देखे तो ये मुश्किलों से जीत पाएंगे और अपने लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे। अगर आप कोशिश करते रहे तो क्या पता आपका लक भी आपका साथ दे और आप जल्दी जीत जाओ क्युकी में तो यह मानता हु कि सिर्फ मेहनत से तो जीता नही जा सकता तोड़ा सा लक भी साथ देना चाहिए और ये में अपने अनुभव के कारण आपसे कह रहा हु, हो सकता है आप मुझसे सहमत न हो। लेकिन मेरा कहने का तात्पर्य बस यही है की हमे रुकना नही है और कोशिश करते रहना है और जीतकर खुदको आगे बड़ाना है। -आपसे फिर मिलूंगा मे...