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तुम पहले....

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घर अपने आप थोड़ी बनता है तुम पहली ईट तो रखो फूल अपने आप थोड़ी खिलता है तुम पहले पानी तो डालो। जीत अपने आप थोड़ी मिलती है तुम पहले कोशिश तो करो अंधेरा अपने आप थोड़ी जाता है तुम पहले दिया तो जलाओ। पैसे अपने आप थोड़ी मिलते है तुम पहले काम तो करो नई शुरुवात अपने आप थोड़ी होती है तुम पहला कदम तो उठाओ। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

लो फिर आया एक नया साल

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लो फिर आया एक नया साल नई खुशियां लेके नई परेशानियां लेके नए सपने लेके नई चुनौतियां लेके तोड़ी सी किस्मत लेके दिसंबर में क्रिसमस लेके ढेर सारे मौके लेके लो फिर आया एक नया साल। "हैप्पी न्यू ईयर" -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

मैं खोया तो नही ?

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मैं अक्सर खुद से सवाल करता हु की मैं खोया तो नही चोट लगने के बाद दिल से पूछता हु तू कही रोया तो नही उमर चौबीस है लेकिन ज़िंदगी को बोहोत करीब से देख लिया है काफी आगे आ चुका हु गिरते चलते सायद और भी दूर जाना है  लेकिन रास्ते कुछ अजीब से है इन्ही रास्तों को देखकर खुद से सवाल करता हु की मैं खोया तो नही। है कुछ सपने अधूरे से पूरे करने की इच्छा और क्षमता भी है लेकिन कुछ जिम्मेदारियों से दबा हुआ हु इसे किस्मत का दोष कहूं या खुदा की परीक्षा एक तरफ मेरी पसंदीदा चीज है और दूसरी तरफ मेरे परिवार की खुशियां इन्ही के बीच रहकर खुद से सवाल करता हु की मैं खोया तो नही। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

उम्मीद....

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उम्मीद का छाता लिए चल रहा हु इस मुश्किलों की बरसात में आस पास लोग कम है बरसात का शोर काफी है मंजिल का पता नही है रास्ता बताने वाला भी कोई नही है अकेले चल रहा हु इस रास्ते पे ना किसी से मिलने की ख्वाइश है ना कही डेरा डालने के लिए वक्त। एक समय था जब वक्त ही वक्त था और आज वक्त ऐसे बीत रहा है जैसे प्थजड में पत्ते कभी खुशियों की कोई गिनती नहीं थी और आज बस कुछ गीनी चुनी खुशियां बची है निराशा के बादल मुझे घेर रहे है मुश्किलों की बरसात हो रही है लेकिन उम्मीद का छाता लिए चल रहा हु इस मुश्किलों की बरसात में। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

हमे क्या होना है हम मर्द है

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हर मुश्किल को हंसकर सह लेते है घर की जिम्मेदारियों को अपने कंधो पे ले लेते है परिवार पर कोई मुसीबत ना आय उसका हमेशा ध्यान रखते है दुख चाहे कितना भी हो लेकिन कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" बचपन से ही हमे सीखा दिया जाता है की मर्द रोते नही कभी कभी रास्ता भटक जाते है लेकिन हम खोते नही मुसीबते सर पे आने से हम ज्यादा सोते नही कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" अपने पैरो पर खड़े होने की कोशिश करते है कई बार गिर भी जाते है लेकिन वापस उठकर जी जान से मेहनत करते है दर्द छुपाने की कला में कुछ इस कदर माहिर है की कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" कभी हमे भी कुछ समझ नही आता ये ज़िंदगी से मन करता है हार मानले ये ज़िंदगी से लेकिन परिवार का चेहरा सामने आने से उम्मीद और हिम्मत दोनो वापस लाने की कोशिश करते है थोड़ी कोशिश रोने की भी करते है लेकिन कोई पूछे हाल हमारा तो हम हंसकर कहते है "हमे क्या होना है हम मर्द है" -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग म...