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एक मिडल क्लास आदमी...

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एक मिडल क्लास आदमी ज्यादा सपने नही देखता क्योंकि वो सच्चाई से अच्छी तरह से वाकिफ है  सपने देखने से पूरे नही होते और अगर गलती से देख भी लिए और पूरे नही हुए तो लोग क्या कहेंगे इसके डर से वो कोशिश ही नही करता। वो बस सोचता है की ठीक ठाक पैसे बनते रहे हर महीने, एक खुदका घर बन जाय, जैसे तैसे बच्चो की पढ़ाई पूरी हो जाए और थोड़े थोड़े पैसे इक्कठा कर के बच्चो की शादी हो जाए इससे ज्यादा वो कुछ नही सोचता क्योंकि वो एक मिडल क्लास आदमी है। कोई भी सामान खरीदने से पहले १० जगह भाव ताव करेगा क्योंकि उसे अपनी क्षमता या बजट पता होता है अगर कभी महंगी चीज लेनी भी पढ़ जाय तो वो दो तीन महीने पहले ही प्लानिंग कर लेता है बिना गारंटी की कोई चीज को हाथ तक नहीं लगाता क्योंकि वो एक मिडल क्लास आदमी है। जिंदगी जीने के बजाय वो कॉम्प्रोमाइज ज्यादा करता है ऐसा नहीं है की उसका दिल नही करता या वो कंजूस है ऐसा इसलिए है क्योंकि उसे पैसे की अहमियत पता है पैसा आता काफी धीरे है लेकिन जाता बोहोत तेज है उसे इस चीज की समझ है क्योंकि वो एक मिडल क्लास आदमी है। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

मेरे पंख होते तो....

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मेरे पंख होते तो मैं निकल जाता  पक्षियों के झुंड के साथ दुनिया की सैर करने ना किसी से मंजूरी लेने की प्रक्रिया ना कोई एक जगह रहने की पाबंदी सबके साथ रहकर ना कोई अकेलापन  और जहां नजर जाय बस दिखे गगन। जहां वो डेरा डालते वहां मैं भी विश्राम कर लेता वो मुझसे पूछते मैं उनसे पूछता जीवन कैसा है वो कहते इंसानी जीवन मैं कहता पक्षी जीवन इसी मीठे तर्क वितर्क के बाद सब मुस्कराते एक साथ मेरे पंख होते तो मैं निकल जाता  पक्षियों के झुंड के साथ दुनिया की सैर करने। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।

मन के विचार

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हार कैसे मानलू मैं अपने पिता से जो सीखा है उम्मीद का फूल कैसे तोड़ दू मैं अपने हाथो से जो सीचा है हंसना कैसे भूलूं मैं  अपनी माता से जो सीखा है। ज़िंदगी है इसलिए तो सता रही है मौत तो आनी है लेकिन वो कहा कुछ बता रही है दिन में चांद देखने की तमन्ना होती है और चांद आते ही सूरज की कामना  फस चुका हु अपने ही विचारो में इनसे बाहर तो आना है लेकिन इनसे दूर भी नही जाना है। -आपसे फिर मिलूंगा मेरे अगले ब्लॉग में।